गर्भाशय फटना" गर्भवती माताओं के लिए चुपके से और सबसे खतरनाक खतरा

गर्भाशय विदर (Uterine Rupture) एक गंभीर प्रसूति आपात स्थिति है और सबसे डरावनी जटिलताओं में से एक है। गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय विदर की घटना दुर्लभ होती है, यह सभी प्रसवों में लगभग 0.07% होती है। हालांकि यह असामान्य है, यह माँ और भ्रूण दोनों के लिए जीवन-धमकी देने वाली स्थिति है। गर्भाशय विदर तब होती है जब गर्भाशय की दीवार अपनी सभी परतों के साथ फट जाती है, जिससे पेट की गुहा में महत्वपूर्ण आंतरिक रक्तस्राव होता है। भ्रूण और अम्नियोटिक द्रव पेट की गुहा में फैल सकते हैं, या भ्रूण गर्भ में ही मर सकता है। यह एक प्रसूति आपात स्थिति है जिसमें माँ और बच्चे दोनों को बचाने के लिए तुरंत शल्य चिकित्सा हस्तक्षेप आवश्यक होता है।
गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय विदर के लिए कौन उच्च जोखिम में है?
गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय विदर के लिए जोखिम कारक वाली महिलाएं इनमें शामिल होती हैं
गर्भाशय विदर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारक
- जन्मजात गर्भाशय असामान्यताएँ (Congenital Uterine Abnormalities): यह गर्भाशय की मांसपेशियों के कुछ हिस्सों को कमजोर कर सकता है, जिससे गर्भावस्था के दौरान या प्रसव के लिए गर्भाशय संकुचन उत्तेजित करने वाली दवाएँ देने पर विदर की संभावना बढ़ जाती है।
- पूर्व गर्भाशय शल्य चिकित्सा (Previous Uterine Surgery): गर्भाशय की मांसपेशियों पर पहले किए गए ऑपरेशन जैसे कि फाइब्रॉइड हटाने की सर्जरी से गर्भाशय की दीवार कमजोर हो जाती है, जिससे गर्भावस्था में विदर का खतरा बढ़ जाता है।
- गर्भाशय विदर का इतिहास (History of Uterine Rupture): यदि किसी महिला को पहले गर्भाशय विदर हो चुका है, तो अगली गर्भावस्था में इसके फिर से होने का जोखिम बढ़ जाता है।
- पूर्व सिज़ेरियन सेक्शन (Previous Cesarean Sections): जिन्होंने सिज़ेरियन डिलीवरी करवाई है, उनमें बाद की गर्भावस्थाओं में गर्भाशय विदर का जोखिम 15-30 गुना अधिक होता है। सिज़ेरियन की संख्या बढ़ने से जोखिम भी बढ़ता है; उदाहरण के लिए, एक बार पूर्व सिज़ेरियन से 0.6% और दो सिज़ेरियन से 1.8% तक जोखिम बढ़ जाता है। किस प्रकार का चीरा लगाया गया, यह भी जोखिम को प्रभावित करता है; वर्टिकल इनसीजन (vertical incision) में विदर की संभावना लो ट्रांसवर्स इनसीजन (low transverse incision) से अधिक होती है।
- मल्टीपल डी एंड सी (Dilation and Curettage) का इतिहास: गर्भावस्था से पहले कई बार डी एंड सी कराने से गर्भाशय की दीवार पतली हो सकती है, जिससे विदर का जोखिम बढ़ जाता है।
- कई बच्चों का होना: बार-बार गर्भवती होने से गर्भाशय की मांसपेशी कमजोर हो सकती है, जिससे भविष्य की गर्भावस्थाओं में विदर का खतरा बढ़ जाता है।
- अत्यधिक गर्भाशय विस्तार (Excessive Uterine Expansion): जुड़वा या बहु-गर्भावस्था, या फाइब्रॉइड के साथ गर्भावस्था, गर्भाशय को सामान्य से अधिक फैला सकती है, जिससे मांसपेशी कमजोर होकर विदर का खतरा बढ़ जाता है।
- बड़ा बच्चा (Large Baby): बड़ा भ्रूण प्रसव के दौरान प्रबल गर्भाशय संकुचन पैदा कर सकता है, जिससे विदर का खतरा बढ़ जाता है।
- भ्रूण की असामान्य स्थिति (Abnormal Fetal Positioning): यदि भ्रूण ट्रांसवर्स लाई (transverse lie) में है, तो सामान्य प्रसव में बाधा आ सकती है और अत्यधिक संकुचन प्रयासों के कारण विदर की संभावना बढ़ सकती है।
- गर्भाशय उत्तेजक दवाओं का अत्यधिक उपयोग (Excessive Use of Uterine Stimulants): प्रसव का प्रेरण करने वाली दवाओं का अत्यधिक उपयोग गर्भाशय के अत्यधिक संकुचन का कारण बन सकता है, जिससे विदर का जोखिम बढ़ जाता है।
- सहायक प्रसव या शल्य हस्तक्षेप (Assisted Deliveries or Surgical Interventions): फोर्सेप्स का उपयोग, या गर्भ में बच्चे को घुमाने वाली प्रक्रियाएं, विदर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
- बाधित प्रसव (Obstructed Labor): जो प्रसव सामान्य से अधिक लंबा या जटिल हो, उसमें विदर की संभावना बढ़ जाती है।
- गंभीर आघात (Severe Trauma): गर्भाशय पर कोई भी गंभीर चोट या आघात विदर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
"गर्भाशय विदर" के चेतावनी संकेत
- अचानक तेज पेट दर्द या पेट में कुछ "फटने" का अहसास
- असामान्य गर्भाशय संकुचन या अचानक संकुचन बंद होना
- असामान्य योनि रक्तस्राव (कुछ मामलों में बाहरी रक्त नहीं दिखता, क्योंकि रक्त पेट के भीतर हो सकता है)
- निम्न रक्तचाप, चक्कर आना, बेहोशी, ठंडे हाथ, हृदय की धड़कन तेज होना, और रक्तस्राव के कारण शॉक की स्थिति
- भ्रूण की असामान्य हृदयगति, जैसे कि हृदयगति कम हो जाना या बिल्कुल भी धड़कन नहीं सुनाई देना
गर्भवती महिलाओं में डॉक्टर गर्भाशय विदर का निदान कैसे करते हैं?
डॉक्टर गर्भवती महिलाओं में गर्भाशय विदर का निदान इस प्रकार करते हैं:
1. चिकित्सा इतिहास (Medical History): इसमें ऊपर बताए गए जोखिम कारक शामिल होते हैं, या जहां डॉक्टर ने प्रसव शीघ्र कराने के लिए गर्भाशय संकुचन उत्तेजित करने वाली दवा दी हो। यदि मरीज़ को प्रसव दर्द के तुरंत बाद चक्कर आना, बेहोशी, पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ-पैर ठंडे होना, और पलकें पीली होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह गर्भाशय विदर की ओर संकेत कर सकता है।
2. शारीरिक परीक्षण (Physical Examination):
माँ के लिए: प्रारंभिक लक्षण सामान्य प्रसव दर्द से अलग पहचानना कठिन हो सकता है। लेकिन यदि पेट में अत्यधिक रक्तस्राव है, तो मरीज़ के लक्षण स्पष्ट हो जाते हैं जैसे कि महत्वपूर्ण संकेतों में परिवर्तन (नाड़ी की गति बढ़ना, रक्तस्राव के कारण निम्न रक्तचाप, पेट कठोर व कड़ा होना, डॉक्टर के छूने पर अत्यधिक दर्द, और शॉक)।
भ्रूण के लिए: बच्चा स्पर्श में तो महसूस हो सकता है पर गर्भाशय नहीं। सबसे सामान्य और प्रारंभिक संकेत है भ्रूण की असामान्य हृदयगति (abnormal fetal heart rate), विशेषकर अचानक गिरावट, जो भ्रूण तक अपर्याप्त रक्त आपूर्ति दर्शाता है। यदि भ्रूण की धड़कन नहीं सुनाई देती, और विदर बड़ा है तथा बच्चा गर्भ से बाहर हो गया है, तो भ्रूण जीवित नहीं रहता।
3. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): अल्ट्रासाउंड उन मामलों में निदान में सहायक होता है जब माँ और भ्रूण दोनों के लक्षण स्पष्ट और स्थिर नहीं हैं। यह भ्रूण के स्वास्थ्य और स्थिति का मूल्यांकन करने, पेट में तरल या रक्त को देखने, और गर्भाशय की स्थिति का आकलन करने में सहायता करता है।
गर्भवती महिलाओं में गर्भाशय विदर का उपचार कैसे करें?
ACOG और AAFP (American College of Obstetricians and Gynecologists and American Academy of Family Physicians) के अनुसार उपचार दिशानिर्देश जोर देते हैं कि शिशु को ऑक्सीजन की कमी से बचाने के लिए आपातकालीन सिज़ेरियन डिलीवरी तुरंत की जानी चाहिए। मूल लक्ष्य निर्णय से लेकर चीरा लगाने तक की प्रक्रिया 30 मिनट के भीतर पूरी करना होता है। केस स्टडीज से पता चला है कि समय पर फेटल रेस्क्यू सर्जरी की गति से जुड़ा है (कुछ मामलों में यह 17-18 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए) ताकि माँ और शिशु की मृत्यु या विकलांगता से बचा जा सके। गर्भाशय विदर का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है, जैसे फटने का आकार और गहराई, माँ के रक्तस्राव की गंभीरता, और भविष्य में गर्भवती होने की इच्छा।
- यदि माँ का रक्तस्राव कम है, विदर छोटा है, और भविष्य में गर्भवती होना चाहती हैं, तो डॉक्टर आमतौर पर गर्भाशय को संरक्षित करके मरम्मत करते हैं।
- गंभीर मामलों में, जहां कई जगह विदर हैं, अधिक रक्तस्राव है, और स्थिति अस्थिर है, डॉक्टर को माँ और बच्चे की जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालना पड़ सकता है।
गर्भवती महिलाओं में गर्भाशय विदर को कैसे रोकें
गर्भवती महिलाओं में गर्भाशय विदर को इन उपायों से रोका जा सकता है:
- प्रारंभिक और नियमित प्रसवपूर्व देखभाल: डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह पालन करें।
- गर्भधारण संख्या सीमित करें: यदि आपने सिज़ेरियन सेक्शन कराया है, तो दो से अधिक सिज़ेरियन से गर्भाशय विदर का जोखिम बढ़ जाता है। American College of Obstetricians and Gynecologists (ACOG) तीन से अधिक सिज़ेरियन न कराने की सलाह देता है।
- सिज़ेरियन के बाद गर्भावस्था में कम से कम 1.5 से 2 वर्ष का अंतर रखें ताकि गर्भाशय का चीरा अच्छी तरह ठीक हो सके।
- अपने प्रसूति विशेषज्ञ को हमेशा सूचित करें यदि आपने पूर्व में गर्भाशय पर कोई सर्जरी या डिलेटेशन एंड क्यूरेटेज (D&C) जैसे प्रोसिजर कराए हों।
- चेतावनी संकेतों पर ध्यान दें: यदि आपको अचानक तेज पेट दर्द, योनि से रक्तस्राव, या भ्रूण की हरकत में कमी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
क्या गर्भाशय विदर के बाद महिला फिर से गर्भवती हो सकती है?
यदि गर्भाशय नहीं निकाला गया है, तो महिला फिर गर्भधारण कर सकती है। हालाँकि, फिर से गर्भ रखने से पहले कम से कम 1.5 से 2 वर्ष का इंतजार करने की सलाह दी जाती है ताकि गर्भाशय के निशान पूरी तरह से ठीक हो जाएं। बाद की गर्भावस्थाओं में पुराने निशान के फिर से फटने की संभावना रोकने के लिए सिज़ेरियन डिलीवरी आवश्यक रहेगी।
गर्भाशय विदर एक गंभीर स्थिति है जिसे रोका जा सकता है। फित्सानुलोक फिचित अस्पताल (Phitsanulok Phichit Hospital) सभी माताओं को नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने और किसी भी पूर्व सर्जरी के बारे में अपने प्रसूति विशेषज्ञ को विस्तार से बताने की सलाह देता है, ताकि डॉक्टर माँ और शिशु दोनों के लिए सबसे सुरक्षित प्रसव की योजना बना सकें।
स्रोत : फित्सानुवेज फिचित अस्पताल
**अनुदित व संकलित : आरोग्यGO कंटेंट टीम
स्वतंत्र लेखक
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