जब बच्चे को बुखार का दौरा हो

जब बच्चे को ज्वरजन्य दौरा (Febrile Seizure) आता है
बच्चों में ज्वरजन्य दौरे आमतौर पर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होते हैं और केवल 2-4% बच्चों को प्रभावित करते हैं। हालांकि, माता-पिता को बहुत ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यदि दौरा गंभीर न हो तो मस्तिष्क को नुकसान पहुँचना बहुत ही दुर्लभ होता है।
ज्वरजन्य दौरे के लक्षण
हाई फीवर (उच्च बुखार) के कारण बच्चे को दौरा आने के संकेतों में शामिल हैं:
० बेहोशी या प्रतिक्रिया न देना
० लगातार एक दिशा में देखना या टकटकी लगाना
० अंगों में अकड़न या झटके आना, या पूरे शरीर में ऐंठन (Generalized Body Convulsions)
० कुछ बच्चों के मुंह में झागदार लार आ सकती है और वे मूत्र या मल त्याग (Incontinence) भी कर सकते हैं
ज्वरजन्य दौरे आम तौर पर स्वयं 5-10 मिनट के भीतर समाप्त हो जाते हैं। अगर आप अपने बच्चे को दौरा पड़ते देखें, तो ये करें:
1. मुंह की जाँच करें कि कहीं कोई वस्तु तो एयरवे (Airway) नहीं अवरुद्ध कर रही है। यदि कोई वस्तु दिखे, तो तुरंत हटा दें, क्योंकि यह श्वास मार्ग को बंद कर सकती है।
2. बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएं ताकि उचित देखभाल मिल सके।
अस्पताल में, डॉक्टर बच्चे के चिकित्सा इतिहास का मूल्यांकन करेंगे, जिसमें शामिल है:
० बुखार कितने समय से है
० दौरा कितनी देर चला और कितने मिनट चला
० बुखार से संबंधित अन्य कोई लक्षण
ये जानकारियाँ निदान (Diagnosis) और उपचार योजना (Treatment Plan) के लिए महत्वपूर्ण हैं।
ज्वरजन्य दौरे का प्रभाव
यदि दौरा छोटा और गंभीर न हो, तो आमतौर पर यह मस्तिष्क की कार्यक्षमता या बुद्धि पर असर नहीं डालता। हालांकि, यदि बच्चे को बार-बार और जल्दी-जल्दी तेज बुखार आता है, तो फिर से दौरा पड़ने की संभावना अधिक हो जाती है। कुछ मामलों में, पारिवारिक इतिहास (Family History) में दौरे होने की वजह से भी बच्चे में ज्वरजन्य दौरे की संभावना बढ़ सकती है।

बुखार के कारण ज्वरजन्य दौरे को कैसे रोकें
1. सामान्य तापमान के पानी से बार-बार शरीर पोंछें
ठंडा पानी न इस्तेमाल करें, क्योंकि इससे शरीर अचानक प्रतिक्रिया कर सकता है और शॉक (Shock) की संभावना हो सकती है। इसी तरह, गर्म पानी का उपयोग करने से तापमान कम नहीं होगा।
० सही तरीका: हाथों से ऊपर की ओर यानी बाहों तक स्पंज करें।
2. शिशुओं के लिए:
आप बच्चे को हल्के गुनगुने पानी के टब (या बाल्टी) में नहला सकते हैं। साबुन का उपयोग न करें; बस गीले स्पंज से बच्चे के सिर को पोंछें ताकि तापमान कम हो सके।
3. बड़े बच्चों के लिए:
यदि वे नहा सकते हैं, तो उन्हें नहाने दें, इससे बुखार कम करने में मदद मिलेगी।
4. पोंछने के बाद:
पोंछने के बाद क्रीम या पाउडर न लगाएं, क्योंकि इससे शरीर के ताप का उत्सर्जन बाधित हो सकता है।
5. अधिक कपड़े न पहनाएँ:
बच्चे को मोटे कपड़े या भारी कंबल न ओढ़ाएँ, इससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाएगी और दौरे का खतरा बढ़ सकता है।
6. यदि आप थके हुए हैं और नजर नहीं रख सकते:
अगर आप बहुत थक गए हैं या बच्चे पर ठीक से नजर नहीं रख पा रहे हैं, तो बेहतर है कि बच्चे को अस्पताल में भर्ती करा दें। वहां नर्सें बच्चे की देखभाल करेंगी और तेज बुखार के कारण दौरे से बचाव करेंगी।
निष्कर्ष
ज्वरजन्य दौरे 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सामान्य हैं और अधिकतर मामलों में इससे दीर्घकालिक मस्तिष्क क्षति नहीं होती। बुखार के दौरान बच्चे पर नजर रखना जरूरी है, साथ ही उचित बुखार नियंत्रण और रोकथाम से दौरे की आशंका कम की जा सकती है। यदि दौरा हो, तो शांत रहें, बच्चे के मुंह से कोई भी वस्तु निकालें और तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।
स्रोत : Muangloei Ram Hospital
**अनुवादित एवं संकलित: ArokaGO कंटेंट टीम
स्वतंत्र लेखक
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