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बच्चे और दंत समस्याएँ

VVibhavadi Hospitalon April 5, 20264 मिनट पढ़ें
बच्चे और दंत समस्याएँ

बच्चों और दंत समस्याएँ बच्चों में एक महत्वपूर्ण दंत समस्या दंत क्षय (Tooth Decay) है। दंत क्षय के कारण दंत क्षय तब होता है जब मुँह में भोजन के अवशेषों से शर्करा (Sugar) के साथ दंत पट्टिका (Dental Plaque) में उपस्थित बैक्टीरिया प्रतिक्रिया करते हैं और अम्ल (Acid) उत्पन्न करते हैं। यह अम्ल इतना केंद्रित हो सकता है कि वह दाँत की सतह को क्षतिग्रस्त कर दे, जिससे अंततः दंत क्षय हो जाता है।

 

बच्चों में एक महत्वपूर्ण दंत समस्या दंत क्षय है।

दंत क्षय के कारण

     दंत क्षय तब होता है जब दंत पट्टिका (Dental Plaque) में उपस्थित बैक्टीरिया मुँह के अंदर भोजन के अवशेषों में मौजूद शर्करा के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और इतना मजबूत अम्ल (Acid) उत्पन्न करते हैं कि वह दाँत की सतह को क्षतिग्रस्त कर कैविटी (Cavity) बना देते हैं। सामान्यतः, जब दाँत साफ रहते हैं और उन पर भोजन के अवशेष नहीं रहते, तो लार (Saliva) थोड़ा क्षारीय होती है और अम्ल-क्षार संतुलन (Acid–Base Balance) बनाए रखने के लिए बफर का कार्य करती है। लेकिन यदि मुँह साफ नहीं है और दाँतों के बीच भोजन का कचरा फँसा रहता है, तो Streptococcus mutans बैक्टीरिया सुक्रोज (Sucrose) को तोड़ने के लिए एंजाइम्स (Enzymes) बनाते हैं और मौखिक गुहा (Oral Cavity) में अम्ल उत्पन्न करते हैं, जिससे लार अधिक अम्लीय हो जाती है। यदि पर्याप्त मात्रा में अम्ल बनता है और मुँह का पीएच स्तर (pH Level) 4.5 से नीचे गिर जाता है, तो दाँत की सतह क्षरण (Erosion) होने लगती है। अम्ल, इनैमल (Enamel) और डेंटिन (Dentin) में मौजूद कैल्शियम (Calcium) से प्रतिक्रिया करता है और दाँत संरचना से कैल्शियम एवं फॉस्फेट (Phosphate) को घोल देता है। नतीजतन, दाँत की सतह कमजोर, मुलायम और छिद्रयुक्त हो जाती है, जिससे कैविटी बनती है। यदि इसका उपचार नहीं किया गया, तो कैविटी और बड़ी व गहरी होती जाएगी, जो दंत लुगदी (Dental Pulp) के निकट पहुँच सकती है, जिससे बाद में दाँत का संवेदनशील होना या दंत पीड़ा (Toothache) हो सकती है।

 

बच्चों में दंत क्षय के चरण और उनका उपचार

1. प्रारंभिक चरण का दंत क्षय
     इस चरण में इनैमल (Enamel) में छोटे-छोटे गड्ढे बनने लगते हैं। क्षय हल्के गड्ढों के रूप में प्रकट होता है, जो दाँत की सतह पर भूरे या काले धब्बों के रूप में दिख सकते हैं। इस अवस्था में सामान्यतः दर्द या संवेदनशीलता नहीं होती है।
उपचार: डेंटल सीलैंट्स (Dental Sealants) या फिलिंग्स (Fillings)।

2. दंत क्षय डेंटिन (Dentin) में फैलना
     इस चरण में क्षय डेंटिन परत के अंदर गहराई तक पहुँच जाता है। बच्चा ठंडा पानी पीने पर दाँत में संवेदनशीलता महसूस कर सकता है। उपचार: फिलिंग्स, जो शुरुआती चरण से अधिक जटिल प्रक्रिया है। कुछ मामलों में, उपचार के दौरान संवेदनशीलता या दर्द न हो, इसके लिए फिलिंग से पहले स्थानीय एनेस्थीसिया (Local Anesthesia) भी दिया जा सकता है।

 

रोकथाम

 - प्रत्येक भोजन के बाद फ्लोराइड (Fluoride) युक्त टूथपेस्ट से दाँतों को सही ढंग से और अच्छी तरह ब्रश करें। भोजन के अवशेष को मुँह में ज्यादा देर तक न रहने दें।
 - प्रत्येक 6 महीने में एक बार डेंटिस्ट (Dentist) से दंत परीक्षण करवाएँ।
 - जिन दाढ़ों (Molars) में गहरे गड्ढे व दरारें (Deep Pits and Fissures) होती हैं, उनमें भोजन फँसना व साफ करना कठिन होता है, जिससे उनमें कैविटी बनने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे दाँतों पर दंत सीलैंट्स (Dental Sealants) लगवाने चाहिए ताकि दंत क्षय से बचाव हो सके।
 - बच्चों के लिए पौष्टिक आहार चुनें, जैसे मांस, दूध, अंडे, सब्जियाँ व फल आदि। अत्यधिक मीठा और चिपचिपा भोजन देने से बचें।

3. दंत क्षय का लुगदी (Pulp) तक पहुँचना
     इस चरण में दाँत दर्द आमतौर पर हमेशा रहता है।
उपचार: संक्रमित लुगदी के ऊपरी हिस्से को हटाया जाता है और शेष स्वस्थ लुगदी को संरक्षित करने के लिए दवा डाली जाती है (Pulpotomy), इसके बाद फिलिंग की जाती है। यदि क्षय इतना व्यापक है कि केवल फिलिंग से उपचार नहीं हो सकता, तो डेंटिस्ट स्टेनलेस स्टील क्राउन (Stainless Steel Crown) लगा सकते हैं। यह क्राउन, दूध के दाँत के गिरने और स्थायी दाँत (Permanent Tooth) के निकलने पर अपने आप निकल जाता है।

4. दाँत की जड़ (Root) के चारों ओर फोड़ा (Abscess) या संक्रमण
     इस चरण में सूजन भी हो सकती है। लक्षण पूर्ववर्ती चरणों से अधिक गंभीर होते हैं और दर्द तीव्र एवं कष्टदायक हो सकता है। कुछ बच्चों को मुँह खोलने में कठिनाई, गालों में सूजन, ठुड्डी या यहाँ तक कि आँखों की पलकों में भी सूजन हो सकती है।
उपचार: यदि दाँत को अब भी बचाया जा सकता है, तो रूट कैनाल ट्रीटमेंट (Root Canal Treatment) और क्राउन (Crown) किया जा सकता है। गंभीर मामलों में, जब दाँत को बचाना संभव न हो, तो एक्सट्रैक्शन (Extraction) यानी दाँत निकालना आवश्यक है, इसके बाद स्थायी दाँत के सही ढंग से निकलने के लिए **स्पेस मेंटेनर (Space Maintainer)** लगाया जाता है।

 

 

 

स्रोत : 

विभावदी अस्पताल

 

 


 

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Vibhavadi Hospital

स्वतंत्र लेखक

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