ऑस्टियोपोरोसिस के लिए लक्षित उपचार

ऑस्टियोपोरोसिस का वर्तमान उपचार पारंपरिक प्रतिक्रिया-आधारित दृष्टिकोण से लक्ष्य-निर्दिष्ट दृष्टिकोण की ओर विकसित हो गया है। लक्षित उपचार की मुख्य अवधारणा यह है कि प्रत्येक रोगी को सबसे उपयुक्त दवा मिले ताकि फ्रैक्चर के जोखिम को यथाशीघ्र और प्रभावी ढंग से कम किया जा सके। उपचार का अंतिम लक्ष्य है फेक्चर-रहित रहना।
लक्षित थेरेपी समानता के ऊपर न्याय को महत्व देती है; अर्थात्, उपचार प्रत्येक व्यक्ति की विशेषताओं के अनुसार अनुकूलित होना चाहिए। उपचार लक्ष्य और उपचार चयन इसलिए व्यक्तिगत होना चाहिए, जो फ्रैक्चर के इतिहास, कशेरुक फ्रैक्चर की व्यापकता, फ्रैक्चर के बाद बीता समय, आयु और रीढ़ तथा हिप में हड्डी घनत्त्व (bone density) की जानकारी पर आधारित है।
उपचार लक्ष्य का चयन
उपचार लक्ष्य का चयन रोगी के प्रारंभिक जोखिम कारकों पर निर्भर करता है:
1. वे रोगी जिनमें तुरंत फ्रैक्चर होने का खतरा है।
इस समूह में वे शामिल हैं जिनमें 2 वर्षों के भीतर फ्रैक्चर का खतरा > 10% है, हाल ही में कोई क्लीनिकल फ्रैक्चर हुआ है (< 2 वर्ष), रेडियोग्राफी पर कशेरुक फ्रैक्चर (vertebral fracture) मिला है, या जिनका फ्रैक्चर का बहुल इतिहास है।
उपचार का लक्ष्य: फ्रैक्चर जोखिम को शीघ्र और अधिकतम स्तर तक कम करना।
2. वे रोगी जिनमें तुरंत फ्रैक्चर का खतरा नहीं है (गैर-तत्काल जोखिम)
इस समूह में, BMD T-score को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें टोटल हिप (Total Hip) मुख्य संकेतक होगा, क्योंकि अनुसंधानों ने दिखाया है कि टोटल हिप BMD में बदलाव, फ्रैक्चर जोखिम में कमी का सबसे अच्छा पूर्वानुमानक है .
- बेसलाइन T-score < -2.5
उपचार लक्ष्य: T-score को > -2.5 तक बढ़ाना, और यदि रोगी का फ्रैक्चर का इतिहास या अन्य मुख्य जोखिम कारक हैं, तो इसे > -2.0 तक भी बढ़ाने का प्रयास किया जा सकता है।
- बेसलाइन T-score > -2.5
उपचार लक्ष्य: टोटल हिप (total hip) में कम से कम 3% एवं लम्बर स्पाइन (lumbar spine) में 5% तक BMD की वृद्धि प्राप्त करना, क्योंकि उच्च BMD कम फ्रैक्चर जोखिम से जुड़ी हुई है।
उपचार का चयन
1. तुरंत फ्रैक्चर के जोखिम वाले रोगियों के लिए उपचार।
चूंकि लक्ष्य यथाशीघ्र और अधिकतम रूप से फ्रैक्चर जोखिम कम करना है, anabolic agents जैसे teriparatide, abaloparatide, और romosozumab इस लक्ष्य को पाने के लिए सबसे अच्छे विकल्प हैं। तुलनात्मक अध्ययनों से पता चला है कि anabolic agents, antiresorptive drugs की तुलना में फ्रैक्चर जोखिम कम करने में अधिक प्रभावी हैं, जैसे कि VERO अध्ययन 2 (Teriparatide > Risedronate) और ARCH अध्ययन 3 (Romosozumab > Alendronate)।
2. BMD लक्ष्य प्राप्त करने हेतु उपचार।
प्राथमिक दवा के चयन में इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि वह BMD को कितना बढ़ा सकती है तथा निर्धारित समय (लगभग 3 वर्ष) में लक्षित T-score > -2.5 को हासिल करने की कितनी संभावना है, विशेषकर जब प्रत्येक दवा प्राप्त करने वाले 50% से अधिक रोगियों में यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सके, जैसा कि निम्नलिखित तालिका में दिखाया गया है।
3. Anabolic agents से आगे उपचार का चयन
2 वर्ष तक teriparatide या 1 वर्ष तक romosozumab से उपचार पूरा होने पर, हड्डी घनत्त्व (BMD) बनाए रखने के लिए antiresorptive drugs से उपचार महत्वपूर्ण है। सिद्धांत इस प्रकार है:
- यदि रोगी का BMD लक्ष्य के निकट है, जैसे -2.5 (या -2.0), तो bisphosphonates अधिक उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं क्योंकि BMD लक्ष्य पाने के बाद अस्थायी drug holiday की संभावना रहती है। यदि रोगी का BMD अभी लक्ष्य से दूर है, तो denosumab का दीर्घकालिक या विस्तारित प्रयोग बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि denosumab BMD बढ़ाने व फ्रैक्चर के जोखिम को कम करने में bisphosphonates की तुलना में अधिक प्रभावी है।
यदि एक और बार anabolic उपचार देने का विचार किया जाए, तो bisphosphonates बाद के उपचार चक्र में दवा की प्रभावकारिता बनाए रखने के लिए उपयुक्त विकल्प हो सकते हैं।
स्रोत : Doctorwat
Police General Hospital
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